अजित पवार से हाथ मिलाना BJP की भारी भूल?

शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की गठबंधन सरकार बनने जा रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उप-मुख्यमंत्री अजित पवार के बहुमत परीक्षण से पहले ही इस्तीफे के बाद राज्य की सियासत एकदम से बदल गई है। कल पहले अजित पवार के इस्तीफे की खबर आई, फिर फडणवीस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अपने इस्तीफे का ऐलान कर दिया। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के 2 घंटे के अंदर दो बड़े इस्तीफे हो गए। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि क्या बीजेपी ने अजित पवार पर भरोसा कर बड़ी भूल की है?

अजित ने ऐन वक्त पर साथ क्यों छोड़ा? इस सवाल के जवाब में देवेंद्र फडणवीस ने कहा, ‘अजित पवार से हाथ मिलाना गलती थी या नहीं, इसका जवाब मैं सही वक्त पर दूंगा।’

बीजेपी ने अजित पवार के भरोसे पर शनिवार को सरकार बनाई थी। ये भरोसा अजित पवार द्वारा राज्यपाल बीएस कोश्यारी को दिखाए गए उस लेटर पर टिका था, जिसमें एनसीपी विधायकों के समर्थन की बात लिखी थी और सभी के हस्ताक्षर थे। ऐसे में बीजेपी को पूरा भरोसा था कि बहुमत परीक्षण के वक्त उन्हें एनसीपी के सभी 54 विधायकों का वोट मिलेगा। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कल जैसे ही 24 घंटे के अंदर फ्लोर टेस्ट कराने और इस पूरी प्रक्रिया का लाइव टेलिकास्ट कराने का आदेश दिया, तो बीजेपी का दांव उलटा पड़ गया।

देवेंद्र फडणवीस ने कल एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस्तीफे का ऐलान किया। इस दौरान उन्होंने कहा, ‘अजित पवार मुझसे मिले और इस्तीफा देकर कहा कि वह सरकार में अब नहीं बने रह सकते। शीर्ष न्यायालय के आदेश के अनुसार, हम बुधवार को फ्लोर टेस्ट कराकर बहुमत सिद्ध करने में असमर्थ हैं। हमारे पास संख्या बल नहीं है। बीजेपी कभी खरीद-फरोख्त का काम नहीं करती। इसलिए हम अब बहुमत साबित नहीं कर सकते।’ फडणवीस ने कहा, ‘जो भी सरकार बनाएगा, उसे हम शुभकामनाएं देते हैं। हम नई सरकार को काम करना सिखाएंगे।’

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