बिलासपुर अस्पताल में खाली हैं 25 में से 15 पद

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बिलासपुर. बिलासपुर अस्पताल में डॉक्टरों की कमी को लेकर भाजपा ने प्रदेश सरकार के खिलाफ आंदोलनात्मक कदम उठाने का ऐलान किया है। भाजपा का कहना है कि जिला मुख्यालय स्थित क्षेत्रीय अस्पताल में डॉक्टरों के कुल 25 में से 15 पद खाली हैं।
– इसके चलते ईलाज के लिए दूरदराज से आने वाले मरीजों को अत्याधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
– भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य सुभाष शर्मा ने चेताया है कि यदि 31 मई तक रिक्त पद भरने के साथ ही स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू रूप से शुरू नहीं की गई तो 1 जून से वह अस्पताल के गेट के बाहर आमरण अनशन पर बैठ जाएंगे।
– इस मांग को लेकर सोमवार को उनकी अगुवाई में भाजपा कार्यकर्ताओं ने एडीएम विनय कुमार के माध्यम से मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को ज्ञापन भी प्रेषित किया।
– इससे पहले पत्रकारों से बातचीत में सुभाष शर्मा ने कहा कि भाजपा कार्यकाल में बिलासपुर अस्पताल में डॉक्टरों की कोई कमी नहीं थी।
– प्रदेश की मौजूदा कांग्रेस सरकार के उपेक्षित रवैये के चलते यह अस्पताल अव्यवस्था का शिकार होकर रह गया है।
– इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लगभग 4 लाख की आबादी वाले बिलासपुर जिला के मुख्य अस्पताल में लोगों को महज 10 डॉक्टरों की सेवाएं मिल पा रही हैं, जबकि कुल पद 25 हैं।
– गायनी को छोडक़र अन्य बीमारियों के विशेषज्ञ चिकित्सक न होने के कारण पिछले 8 माह से कोई ऑपरेशन भी नहीं हो पाया है। मामूली सी बीमारी होने पर भी मरीजों को चंडीगढ़ या शिमला रेफर कर दिया जाता है।
– ईलाज के लिए दूरदराज से आने वाले मरीज सुबह से शाम तक लंबी लाइनों में खड़े रहकर अपनी बारी का इंतजार करते रहते हैं, लेकिन उनमें से कइयों को शाम के समय बगैर उपचार के ही दर्द से कराहते हुए वापस लौटना पड़ता है।
– बीमारी से निजात पाने के लिए उन्हें मजबूरन प्राईवेट अस्पतालों की शरण लेनी पड़ रही है, जहां मोटी रकम वसूलकर उन्हें लूटा जा रहा है।
– अब अल्ट्रासाउंड का परीक्षण करने वाली डॉक्टर भी 6 माह की छुट्टी पर चली गई हैं।
– कई अन्य परीक्षणों की तरह अल्ट्रासाउंड के लिए भी मरीजों को प्राईवेट क्लीनिकों में जाकर अपनी जेब ढीली करनी पड़ेगी।

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