दक्षिण चीन सागर में विवादित टापू के पास अमेरिकी पोत पहुंचने पर , चीन भड़का

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के दौरान पहली बार ‘नौवहन की स्वतंत्रता के अभियान के तहत’ अमेरिका ने विवादित दक्षिण चीन सागर क्षेत्र के कृत्रिम द्वीप के निकट युद्धपोत भेजा है. इस क्षेत्र पर चीन अपना दावा करता है. चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए इसे ‘भड़काऊ कार्रवाई’ करार दिया है.
मिसाइल विध्वंसक यूएसएस देवे ने मिस्चीफ टापू के 20 किलोमीटर के दायरे में गश्त लगाई. यह टापू स्प्रैटली द्वीपसमूह का हिस्सा है. इसमें चीन दक्षिण चीन सागर के लगभग पूरे क्षेत्र पर अपना दावा करता है. हालांकि, चीन इस क्षेत्र पर ताइवान, फिलीपीन, ब्रुनेई, मलेशिया और वियतनाम भी अपना दावा पेश करते रहे हैं.

पेंटागन के प्रवक्ता जेफ डेविस ने कहा है कि हम एशिया-प्रशांत क्षेत्र में नियमित आधार पर संचालन करते हैं. इसमें दक्षिण चीन सागर भी शामिल है. हम इसका संचालन अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार करते हैं. उन्होंने वॉल स्ट्रीट जर्नल को दिए गए बयान में कहा कि गश्ती किसी भी एक देश को लेकर नहीं है और न ही यह किसी एक जलक्षेत्र को लेकर है. यह अभ्यास अक्टूबर के बाद पहली बार किया गया है.

उधर, चीन ने कहा है कि अमेरिकी युद्धपोत ने ‘बिना इजाजत’ दक्षिणी चीन सागर में प्रवेश किया. चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता रेन गुओकियांग ने कहा है कि हम ताकत दिखाने और क्षेत्रीय सैन्यीकरण को बढ़ावा देने के अमेरिकी व्यवहार का पुरजोर विरोध करते हैं. हमने अमेरिकी पक्ष को इससे अवगत करा दिया है. चीन के विदेश मंत्रालय ने भी अमेरिका के इस कदम की आलोचना की है.
द हिल की खबर के मुताबिक नौवहन की स्वतंत्रता से जुड़ी गश्त का संचालन करके राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन को एक ऐसे समय पर गुस्सा दिला रहे हैं, जब अमेरिका उत्तर कोरिया पर लगाम लगाने के लिए चीन से अधिक सहायता की मांग कर रहा है.

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