EWS के मास्टर स्ट्रोक ने राजस्थान में लगाई कांग्रेस की नैया पार

राजस्थान में निकाय चुनाव के पहले चरण के नतीजों में कांग्रेस को 973 वार्डों में सफलता मिली है। इसी के साथ 49 निकायों में से 30 में कांग्रेस का बोर्ड बनना लगभग तय माना जा रहा है। जबकि बीजेपी महज 7 निकायों में बोर्ड बनाने तक सिमट गई हैं। कांग्रेस इस सफलता के पीछे कांग्रेस सरकार का EWS आरक्षण के मास्टर स्ट्रोक को भी बताया जा रहा है। गहलोत सरकार ने EWS में नया फॉर्मूला लागू करते हुए अब EWS आरक्षण में अचल संपत्ति के प्रावधान को हटा दिया है। इस प्रावधान के बाद से सीएम गहलोत का आभार जताने जो संगठन और समुदाय के लोग राजधानी पहुंच रहे थे उनमें BJP के समर्थक भी थे। निकाय चुनाव से ठीक पहले गहलोत सरकार ने इस फैसल से बीजेपी के वोट बैंक में सैंध लगाई और नतीज भी उनके अनुकूल ही सामने आए।

गहलोत सरकार ने पिछड़े सवर्णों को राहत देते हुए उनको देय 10 प्रतिशत आरक्षण में बाधा बन रहे भूमि और भवन संबंधी प्रावधान को खत्म कर दिया है। गहलोत ने पिछले महीने ही इसकी घोषणा की थी। बाद में इस घोषणा को निकाय चुनाव से पहले तत्काल अमली जामा पहना दिया। राज्य सरकार के इस निर्णय से EWS आरक्षण से की एक बड़ी जटिलता खत्म हो गई है। अब पिछड़े सवर्णों को इसका प्रमाण-पत्र बनवाने में आसानी रहेगी।

संपत्ति संबंधी प्रावधान पूरी तरह से समाप्त कर दिए जाने से अब परिवार की कुल वार्षिक आय अधिकतम 8 लाख रुपए ही इसका आधार मानी जाएगी। पहले इस पेचिदा प्रावधान के कारण सामान्य वर्ग की 20 फीसदी से भी कम आबादी इस आरक्षण के दायरे में आ रही थी। लेकिन इस अहम बदलाव के बाद अब EWS आरक्षण में 90 फीसदी से ज्यादा आबादी कवर हो जाएगी। सरकार के इस फैसले से प्रक्रियाधीन भर्तियों में भी अभ्यर्थियों को लाभ मिल सकेगा।

सीएम अशोक गहलोत के इस निर्णय पर राजपूत और ब्राह्मण समाज सहित लाभान्वित होने वाले समाजों के नेताओं ने उनका आभार जताया है। क्षत्रिय युवक संघ प्रमुख भगवान सिंह रोलसाहबसर ने सीएम को धन्यवाद देते हुए कहा कि गहलोत ने आरक्षण से जुड़ी जटिलताओं को खत्म कर दिया है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को सकारात्मक संदेश मिला है।

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