सरकार उठा सकती है नोटबंदी के बाद बड़े कदम

नोटबंदी के एक साल पूरा होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी की तर्ज पर एक और योजना बनाई है. माना जा रहा है कि इस अवसर पर मोदी बेनामी सम्‍पत्ति के खिलाफ जंग का ऐलान करेंगे. जानकारों के अनुसार, मोदी हर हाल में यह संदेश देना चाहते हैं कि नोटबंदी ब्‍लैकमनी के खिलाफ उनकी लड़ाई का एक अहम हिस्‍सा था और यह लड़ाई अभी जारी रहेगी. सूत्रों की मानें तो मोदी 2019 का आम चुनाव भी भ्रष्‍टाचार के मुद्दे पर ही लड़ना चाहते हैं, इसलिए वे इस अभियान को आगे ले जाना चाहते हैं.जबकि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत विपक्षी नेताओं ने मांग की है कि नोटबंदी के एक साल पूरा होने के अवसर पर मोदी को स्‍वीकार करना चाहिए कि यह उनकी एक गलती थी, क्‍योंकि इससे न सिर्फ इकोनॉमिक ग्रोथ 2 फीसदी कम हुई, बल्कि लाखों लोगों की नौकरी भी गई.

बेनामी संपत्ति के खिलाफ बड़े पैमाने पर पूरे देश में अभियान चलाया जाएगा. प्रस्तावित अभियान में अगर मालिकाना हक के कानूनी सबूत नहीं मिले तो बेनामी संपत्तियों को सरकार अपने कब्जे में ले सकती है. इन बेनामी संपत्तियों को भी गरीबों के लिए किसी योजना से जोड़ा जा सकता है. उदाहरण के लिए ब्लैक मनी के लिए दोबारा लाई डिस्‍क्‍लोजर स्कीम के तहत राशि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना में डाली गई थी. सरकार उम्मीद कर रही है कि बेनामी संपत्ति के खिलाफ इस अभियान में कई बड़े सफेदपोश नेताओं का असली चरित्र भी सामने आ सकता है.जानकारों के अनुसार, सरकार 2019 के लोकसभा चुनावों ब्‍लैकमनी के मुद्दे को जिंदा रखना चाहती है. चूंकि अभी तक सरकार के खिलाफ भ्रष्‍टाचार का कोई बड़ा मुद्दा नहीं आया है, ऐसे में इस मुद्दे पर ही वह चुनाव लड़ने की रणनीति बना रही है.सरकारी मशीनरी का मानना है कि नोटबंदी के एक साल बाद जब हालात बेहतर हो चुके हैं तो इसी तरह का दूसरा अभियान शुरू करने से लोगों में सकारात्मक संदेश जाएगा.

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