राजस्थान में राज्य सरकार ने तय की COVID-19 की इलाज की दरें

राजस्थान में तेजी से फैल रहे कोरोना संक्रमण के मद्देनजर अशोक गहलोत सरकार ने निजी लैब और अस्पतालों में कोरोना की जांच तथा इलाज की दरें तय कर दी है। कोरोना टेस्ट के लिए अब निजी लैब 2200 रुपए से ज्यादा नहीं ले सकेंगी। वहीं निजी अस्पताल वेंटीलेटर सहित बेड का 4000 रुपए प्रतिदिन से ज्यादा नहीं वसूल कर सकेंगे। अगर कोई लैब या अस्पताल ऐसा करता पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

कल देर रात सीएम निवास पर दो घंटे से ज्यादा समय तक चली समीक्षा बैठक में यह फैसला किया गया। सीएम ने चिकिसा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि निजी अस्पतालों में कोरोना के मरीजों से अधिक बिल की वसूली ना हो। इसके लिए महामारी अधिनियम सहित अन्य प्रावधानों के तहत आदेश जारी किए जाएं और उनकी सख्ती से पालना हो। सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कोरोना जांच और इलाज में तय दरों से ज्यादा वसूली करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

काफी समय से कोराना जांच और इलाज को लेकर निजी अस्पतालों के खिलाफ अधिक वसूली की शिकायतें आ रही थीं। इन शिकायतों के बाद सीएम ने कोराना जांच और इलाज की दरों को नियंत्रित करने का फैसला किया है। प्रदेश में कोरोना की रिकवरी दर अचछी है, लेकिन अब भी रोजाना औसत 250 से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे हालात में कोराना जांच और इलाज की मनमानी दरें वसूलने से साधारण लोगों को भारी परेशानी हो रही थी।

राजस्थान में कोरोना की रफ्तार बेहद तेज है। यहां लगातार कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। प्रदेश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 14 हजार के पार हो चुकी है। निजी अस्पतालों में कोराना जांच और इलाज की दरें तय होने से आम लोगों को राहत मिलेगी। अब ज्यादा लोग कोराना की जांच और इलाज के लिए आगे आएंगे, जिससे संक्रमण को रोकने में मदद मिल सकेगी।

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