महाराष्ट्र सरकार ने तीन चीनी कंपनियों के 5 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट पर लगाई रोक

लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हुई झड़प में 20 भारतीय सैनिकों की शहादत के बाद चीन के खिलाफ देशभर के लोगों में आक्रोश दिख रहा है। लोग चीन के सामान की बहिष्कार की बात कर रहे हैं। इस बीच महाराष्ट्र सरकार ने चीन को बड़ा झटका दिया है। राज्य सरकार ने केंद्र से बातचीत के बाद चीन की तीन कंपनियों के प्रोजेक्ट पर फिलहाल रोक लगा दी है। इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 5 हजार करोड़ रुपये की है। अब केंद्र सरकार की गाइडलाइन आने के बाद इस पर कोई फैसला लिया जाएगा।

जिन प्रोजेक्ट पर रोक लगाई गई है, उसमें पुणे से सटे तालेगांव में इलेक्ट्रिक व्हीकल की बड़ी फैक्ट्री भी है। ये करीब 3500 हजार करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट है। हेंगली इंजीनियरिंग- इस कंपनी के साथ भी पुणे के तालेगांव में 250 करोड़ का निवेश करने का करार हुआ था। ग्रेट वॉल मोटर्स ऑटोमोबाइल- इस कंपनी ने सबसे ज्यादा निवेश करने का करार किया था। करीब 3770 करोड़ रुपये का निवेश होना था।

ये सभी करार 15 जून को हुए थे। महाराष्ट्र सरकार ने पिछले दिनों 12 एमओयू पर साइन किए थे। सभी 3 चाइनीज कंपनियों के प्रोजेक्ट होल्ड पर डाल दिए गए हैं, जबकि 9 प्रोजेक्ट के काम फिलहाल जारी रहेंगे। इसमें दूसरे देशों की कंपनियां शामिल हैं। बता दें केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों से चीन के प्रोजेक्ट और आयात पर जानकारी मांगी थी।

इससे पहले टेलिकॉम डिपार्टमेंट भारत संचार निगम लिमिटेड से 4जी अपग्रेडेशन सुविधा में चीनी इक्विमेंट्स का इस्तेमाल नहीं करने नहीं करने का फैसला किया था। टेलिकॉम डिपार्टमेंट ने बीएसएनएल से इस संबंध में अपने टेंडर पर फिर से काम करने को कहा है। वहीं टेलिकॉम डिपार्टमेंट इस बात पर भी विचार कर रहा है कि देश की प्राइवेट मोबाइल सर्विस ऑपरेटर्स भी चीनी कंपनियों के उत्पाद पर अपनी निर्भरता कम करें।

इसके अलावा भारतीय रेलवे ने भी चीन में बनी चीजें इस्तेमाल करने से इनकार कर दिया है। साथ ही चीन की कुछ कंपनियों के साथ कई समझौते भी रद्द कर दिए गए हैं।

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