पाक ने दिया अमेरिका को सटीक जवाब

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आतंकी संगठनों को मदद पर डोनाल्ड ट्रम्प की वॉर्निंग से पाकिस्तान परेशान है। पीएम शाहिद खाकान अब्बासी की अगुआई में हुई हाईलेवल मीटिंग के बाद पाक ने बयान जारी कर कहा है, “हमें बलि का बकरा बनाने से जंग जैसे हालात से जूझ रहे अफगानिस्तान में स्थिरता लाने में मदद नहीं मिलेगी।” पीएम अब्बासी की अगुआई में पाक की नेशनल सिक्युरिटी कमेटी की मीटिंग गुरुवार को हुई, जिसमें विदेश और आतंरिक मामलों के मंत्री, तीनों सर्विस चीफ और खुफिया एजेंसी ISI (इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस) के हेड शामिल हुए। पीएम हाउस में 4 घंटे चली इस मीटिंग में ट्रम्प के अफगानिस्तान और साउथ एशिया पर दिए गए बयान पर चर्चा हुई।पाकिस्तान ने कहा, “इस्लामाबाद को अरबों डॉलर की मदद का दावा कर अमेरिका ने दुनिया को गुमराह किया है। असलियत ये है कि हमें आर्थिक मदद के बजाय यूएस ने अफगानिस्तान में अपने ऑपरेशन, एयर कॉरिडोर के इस्तेमाल और ग्राउंड फैसिलिटीज की कॉस्ट (लागत) की आंशिक भरपाई की है।”

ट्रम्प ने 21 अगस्त को अफगानिस्तान और साउथ एशिया पर अमेरिका की नई पॉलिसी जारी की थी। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान को सख्त चेतावनी दी थी। पाकिस्तान में लोग आतंकवाद से पीड़ित हैं, लेकिन आज पाक आतंकियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह भी है। हम इस पर चुप नहीं बैठ सकते। पाक अपनी दोहरी नीति बंद कर दें या हालात का सामना करने को तैयार रहे। “पाकिस्तान अक्सर अराजकता के एजेंटों, हिंसा और आतंकवाद को सुरक्षित पनाह देता रहा है। अमेरिका द्वारा आतंकी संगठन करार दिए गए 20 ग्रुप अफगानिस्तान और पाक में एक्टिव हैं। पाक अगर अफगानिस्तान में हमारी कोशिशों में हमारा साथ देता है, तो उसे पाने के लिए बहुत कुछ होगा, लेकिन अगर वह आतंकियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बना रहा तो उसे अंजाम भुगतना होगा।”

ट्रम्प ने कहा था, “हम चाहते हैं कि भारत, अफगानिस्तान के डेवलपमेंट में बड़ी भूमिका निभाए। भारत, अमेरिका के साथ ट्रेड में अरबों डॉलर कमाता है, हम भारत के साथ एक गहरी रणनीतिक साझेदारी डेवलप करेंगे, लेकिन हम चाहते हैं कि वो अफगानिस्तान में हमारी ज्यादा मदद करे।”यूएस प्रेसिडेंट ने ये भी कहा, “इराक में जो गलती हो गई, अमेरिका उसे अफगानिस्तान में नहीं दोहराना चाहता। हम अफगानिस्तान में स्थिरता लाने में भारत के अहम योगदान की सराहना करते हैं।” ट्रम्प की भारत से उम्मीद को पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि पाक काबुल में नई दिल्ली की मौजूदगी का विरोध करता रहा है।

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