राजनाथ ने रोहिंग्या को J&K के लिए बताया खतरा

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होम मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने रोहिंग्या मुसलमानों को जम्मू-कश्मीर की सिक्युरिटी के लिए खतरा बताया है। जम्मू-कश्मीर दौरे पर पहुंचे राजनाथ ने रोहिंग्या को देश से बाहर करने के लिए सख्त कार्रवाई के संकेत दिए। उन्होंने कहा कि हम ढाई दशक से आतंकवाद से जूझ रहे कश्मीर के साथ कोई समझौता नहीं कर सकते हैं। करीब 40 हजार रोहिंग्या मुसलमान अवैध तरीके से भारत में शरण लिए हुए हैं। इन्हें बाहर करने के प्रपोजल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन दायर की गई है और इसे संविधान के दिए अधिकारों का वॉयलेशन बताया गया है।

राजनाथ ने कहा- ”केंद्र सरकार अवैध शरणार्थियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी, लेकिन हमें पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के अल्पसंख्यकों के साथ सहानुभूति भी है, जिन्होंने भारत में शरण ली है। रोहिंग्या मुस्लिम जम्मू-कश्मीर के लिए खतरा हो सकते हैं, जो करीब 25 साल से आतंकवाद से लड़ रहा है। हम इससे समझौता नहीं कर सकते हैं। अवैध तरीके से देश में रहने वालों के लिए सरकार की नीति साफ है।”

रोहिंग्या पर यूएन के ह्यूमन राइट हाईकमिश्नर ने फटकार लगाई। इसके एक दिन बाद भारत ने जवाब दिया। यूएन में भारत के पर्मानेंट रिप्रेजेंटेटिव सैयद अकबरुद्दी ने कहा, “हमें इस बात का दुख है कि यूनाइटेड नेशंस की बॉडी (ह्यूमन राइट हाई कमिश्नर) में आतंकवाद की असल समस्या को नजरंदाज कर दिया गया।””ह्यूमन राइट्स का असेसमेंट राजनीतिक सहूलियत के आधार पर नहीं होना चाहिए। हम इस बात पर यकीन करते हैं कि ह्यूमन राइट्स के लक्ष्यों को फैक्ट्स एनालिसिस के जरिए हासिल किया जाना चाहिए। भारत कुछ विशेष अवैध अप्रवासियों को लेकर इसलिए भी चिंतित है, क्योंकि संभव है कि वे सुरक्षा के लिए चुनौती पैदा करें।”ह्यूमन राइट्स काउंसिल 36th सेशन में ऑफिशियल जैद राद अल हुसैन ने रोहिंग्या मुस्लिमों पर भारत के हालिया एक्शन की निंदा की थी। भारत कलेक्टिव एक्सपल्शन (सामूहिक निष्कासन) नहीं कर सकता, वो लोगों को ऐसी जगह पर वापस नहीं भेज सकता जहां उन पर अत्याचार किया जाए। मुझे अफसोस है कि जब रोहिंग्या लोगों पर उनके देश में ऐसी हिंसा हो रही है, तब भारत ऐसे कदम उठा रहा है।’

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